अखिलेश बिल्लौरे मो :- 9425638014
बच्चों में प्रकृति से जुड़ाव, सीख के साथ अनुभव…

हरदा :- जिले के वन, वन्यजीवों एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्कूली विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, प्रचार सह-जागरूकता शिविर के अंतर्गत दिनांक 08 जनवरी 2026 को बोरपानी में “अनुभूति कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक वन वृत्त नर्मदापुरम के निर्देशानुसार एवं वनमण्डलाधिकारी हरदा (सामान्य) के मार्गदर्शन में, उप वनमण्डल अधिकारी दक्षिण हरदा राकेश लहरी के समन्वय से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में तहसीलदार रहटगांव देवशंकर धुर्वे एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी बोरपानी श्रीमती नीता शाह की विशेष उपस्थिति रही।
अनुभूति शिविर में शासकीय हाई स्कूल कचनार एवं शासकीय हाई स्कूल बोरपानी के कुल 135 छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा वन परिक्षेत्र बोरपानी का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
वन, वन्यजीव और मिशन लाइफ का प्रभावी संदेश :-
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों को पक्षी दर्शन एवं प्रकृति पथ पर भ्रमण कराकर की गई। इसके पश्चात वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व के साथ-साथ “मिशन लाइफ” के अंतर्गत संवहनीय जीवनशैली अपनाने की जानकारी दी गई। अनुभूति प्रेरकों द्वारा “हम हैं धरती के दूत”, “मैं भी बाघ” एवं “हम हैं बदलाव” थीम के माध्यम से बच्चों को रोचक व सरल तरीके से संरक्षण का संदेश दिया गया। प्रकृति पथ भ्रमण के दौरान पारिस्थितिक तंत्र, खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल तथा जीव-जंतुओं के पारस्परिक संबंधों को व्यावहारिक उदाहरणों से समझाया गया।
खेल, गीत और नाटक से संरक्षण की शपथ :-
कार्यक्रम में नेचर मेडिटेशन, खाद्य श्रृंखला आधारित खेल, “हू एम आई” गतिविधि तथा “जंगल की अदालत” जैसे नुक्कड़ नाटक आयोजित किए गए, जिससे बच्चों ने खेल-खेल में पर्यावरण संरक्षण की बारीकियां सीखीं। प्रेरकों द्वारा बिना सिले कपड़े से थैली बनाना सिखाकर प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया गया। “मैं भी बाघ” एवं “हम हैं बदलाव” गीत पर बच्चों का उत्साहपूर्ण नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा।
कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों को वन, वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में तथा मिशन लाइफ के अनुरूप जीवनशैली अपनाने की शपथ दिलाई गई। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए सीख और प्रेरणा का स्रोत बना, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत करता है।


