अखिलेश बिल्लौरे मो :- 9425638014
IAS संतोष वर्मा के बयान पर देशभर में हंगामा, हरदा में भी गरमाई राजनीति…
हरदा :- भोपाल में आयोजित अजाक्स संगठन के प्रांतीय अधिवेशन में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आईएएस संतोष वर्मा द्वारा दिए गए विवादित बयान— “आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान में नहीं देता”— को लेकर पूरे देश में चर्चाओं का माहौल गर्म हो चुका है। सोशल मीडिया पर छाए इस बयान के विरोध-समर्थन के बीच अब हरदा जिले में भी हलचल तेज हो गई है।
“एससी एसटी युवा संघ प्रदेश अध्यक्ष राहुल पवारे का पलटवार — “वीडियो काटकर वायरल किया गया, मामला भड़काया जा रहा है”
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष राहुल पवारे ने हरदा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईएएस संतोष वर्मा के बचाव में बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि वे स्वयं उस अधिवेशन में मौजूद थे और संतोष वर्मा का पूरा भाषण 27 मिनट चला था, लेकिन कुछ जातंकवादी मानसिकता वाले लोग और राजनीतिक लाभ लेने वाले नेता” केवल कुछ सेकंड का वीडियो काटकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं।

राहुल पवारे ने कहा कि—
वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर भ्रामक रूप दिया गया।
संतोष वर्मा का मकसद किसी जाति को अपमानित करना नहीं था।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी भी दी है और खेद व्यक्त किया है।
“रोटी-बेटी” का उदाहरण तो कई प्रमुख संतों द्वारा भी दिया गया है।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि—“यदि किसी भी संगठन के दबाव में आकर आईएएस संतोष वर्मा पर कार्रवाई की गई, तो पूरा एससी-एसटी समाज भोपाल की ओर कूच करेगा, जिसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सरकार की होगी।”
“जातिगत शोषण आज भी चरम पर, संतोष वर्मा ने गलत नहीं कहा” — समर्थन में उठी आवाजें
राहुल पवारे और अनुसूचित जाति एवं भीम आर्मी के महेन्द्र काशिव मेहरा और कई स्थानीय संगठनों ने कहा कि देश में आज भी एससी-एसटी समाज के साथ शोषण, छुआछूत, प्रशासनिक भेदभाव और पदोन्नति रोकने जैसी समस्याएँ मौजूद हैं।
उनके अनुसार—
रोस्टर प्रणाली के तहत आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को पदोन्नति नहीं दी जा रही।
आईएएस-आईपीएस अफसरों को फाइलों तक सीमित करने की मानसिकता आज भी मौजूद है।
ऐसे माहौल में संतोष वर्मा ने सामाजिक असमानता पर चोट करने के लिए सामान्य, व्यंग्यात्मक भाषा का उपयोग किया था।
उसे तोड़-मरोड़कर “जाति विरोधी बयान” की तरह पेश किया गया।
समर्थक संगठनों ने कहा कि यह “सोची-समझी साजिश” है जिसमें राजनीतिक फायदा लेने के लिए वीडियो को अलग दिशा दी गई।
इस खबर में कुछ लोगों की सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया भी साझा की गई है।


