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ठंड व पाले से फसल बचाने के लिए मौके पर दी गई वैज्ञानिक सलाह…
हरदा :- जिले में किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कृषि विभाग की सजगता एक बार फिर सामने आई है। उपसंचालक कृषि जवाहरलाल कास्दे, सहायक संचालक डॉ. भागवत सिंह सोलंकी एवं बीटीएम टिमरनी डॉ. श्रीचंद जाट ने शासकीय कृषि प्रक्षेत्र पानतलाई एवं ग्राम क्षेत्र के किसानों के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान किसान सुशील गुर्जर के खेत में गेहूं एवं चना फसल की स्थिति का गहन अवलोकन कर फसल सुरक्षा को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
पाले से बचाव को लेकर वैज्ञानिक उपाय, किसानों को किया गया जागरूक…
हल्की सिंचाई, धुआं एवं गंधक छिड़काव की दी गई सलाह…
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि चना फसल फूल एवं फल बनने की अवस्था में पाले के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती है। ऐसे में अधिक ठंड पड़ने की संभावना पर शाम या रात के समय हल्की सिंचाई करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे तापमान संतुलित रहता है।
इसके साथ ही खेत की उत्तर-पश्चिमी दिशा में, जहां से ठंडी हवा आती है, वहां मेड़ों पर घास-फूस या कचरा जलाकर धुआं करने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने बताया कि धुएं की परत ग्रीनहाउस प्रभाव उत्पन्न कर खेत का तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ा देती है।
यदि किसान सिंचाई या धुआं करने में असमर्थ हों तो 0.1 प्रतिशत गंधक घोल का छिड़काव कर पाले से फसल की सुरक्षा की जा सकती है।

प्रशासन के पक्ष में मजबूत संदेश, प्राकृतिक खेती को भी मिल रहा बढ़ावा…
उन्नत किस्मों के साथ जीवामृत व प्राकृतिक तरीकों का प्रदर्शन…
निरीक्षण के दौरान शासकीय कृषि प्रक्षेत्र में गेहूं की उन्नत किस्म एचआई 1650 एवं चना की आरवीजी 204 का अवलोकन किया गया। साथ ही प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में जीवामृत स्प्रे, निदाई-गुड़ाई एवं समसामयिक फसलों की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने किसानों को जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर गांव के किसान सुशील मणिशंकर गौर, संतोष गौर, रामस्वरूप गौर सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
कृषि विभाग की यह सक्रियता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि प्रशासन किसानों के साथ खड़ा है और उनकी फसलों की सुरक्षा एवं आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।


