अखिलेश बिल्लौरे मो :- 9425638014
हरदा :- जिले के रहटगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बीते कई महीनों से अव्यवस्थाएं और स्टाफ की कमी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। ग्रामीणों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, जिससे गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। विगत दिवस एक गर्भवती महिला को उचित इलाज न मिलने के कारण उसे हरदा रेफर करना पड़ा, जहां दुर्भाग्यवश उसके नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। इस घटना ने ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा पैदा कर दी है।

स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है। एएनएम, लैब तकनीशियन और 24×7 आपात सेवाएं भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र जैसे क्षेत्रीय इकाइयों में भी स्टाफ की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं।

स्टाफ की कमी के विरोध में प्रदर्शन, प्रशासन ने दिखाई तत्परता…
इन समस्याओं के खिलाफ आज स्थानीय लोगों ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की दशा दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।
समजसेवी संदीप अग्रवाल ने बताया कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए एक डॉक्टर की अस्थायी नियुक्ति का आदेश जारी किया है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि यह समाधान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग रखी है कि तीन दिनों के भीतर स्वास्थ्य केंद्र में नियमित डॉक्टर, तीन नर्सें, लैब तकनीशियन और अन्य जरूरी स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीएम हाउस पैथोलॉजी यूनिट की सुविधा तत्काल शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि मरीजों को इधर-उधर भटकना न पड़े।
जयस संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष राकेश काकोड़िया ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने निर्धारित समय में उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
संदीप अग्रवाल (समाजसेवी)
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएं?
एक मानक उप स्वास्थ्य केंद्र (Primary & Sub Health Centre) में आमतौर पर 1 मेडिकल ऑफिसर (MBBS डॉक्टर), 1 नर्स/स्टाफ नर्स, 1 एएनएम, 1 वार्ड बॉय, 1 लैब तकनीशियन की न्यूनतम आवश्यकता होती है। मौजूदा स्टाफ की संख्या इसके मुकाबले बेहद कम है।
रश्मि धुर्वे (नायब तहसीलदार)रहटगांव, जिला हरदा
स्थिति सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग को तत्काल कदम उठाने होंगे :-
1.नियमित डॉक्टरों की नियुक्ति कर उन्हें स्थायी रूप से पदस्थ करना…
2.नर्सों, एएनएम और तकनीकी स्टाफ की संख्या बढ़ाना…
3.24×7 ड्यूटी रोस्टर लागू करना..
4.पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड और आवश्यक जांच सुविधाएं स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर उपलब्ध कराना…
5.दवाओं, उपकरणों और एंबुलेंस सेवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना…
6.महिला स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर प्रसूति सेवाओं को प्राथमिकता देना…
यदि ये कदम तत्परता से लागू किए जाएं, तो रहटगांव और आसपास के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं और ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।


