अखिलेश बिल्लोरे/हरदा
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युवा जोश, आक्रोश और नेतृत्व का अद्भुत संगम “अभिजीत शाह” बने हरदा की जनता की आवाज़—
—कलेक्टर कक्ष के बाहर बैठा धरना बना पूरे प्रदेश की सुर्खी, कांग्रेसियों में नई ऊर्जा का संचार—
1. हरदा में पहली बार दिखा ऐसा आंदोलन — जबशक्ति और जज्बे की मिसाल बने अभिजीत शाह
हरदा जिला प्रशासन के इतिहास में बुधवार का दिन यादगार बन गया। किसान कांग्रेस की मांगों को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन के बीच जो दृश्य देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। जब दो घंटे के इंतज़ार के बाद भी कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे, तो युवा विधायक अभिजीत शाह ने साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए गेट को फांद दिया और सीधे कलेक्टर कक्ष की ओर बढ़ गए।
कलेक्टर उस समय मीटिंग में थे, पर शाह ने वहीं कलेक्टर कक्ष के बाहर धरना शुरू कर दिया और रामधुन गाने लगे। देखते ही देखते माहौल में जोश और ऊर्जा भर गई। पुलिस बल, अधिकारी और कांग्रेस कार्यकर्ता सब उस पल के साक्षी बन गए।
यह पहली बार था जब किसी कांग्रेस नेता ने प्रशासनिक गेट को पार कर कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना दिया। जिले में लोग कहने लगे — “अब कांग्रेसियों में दम है, और इस दम का नाम है — अभिजीत शाह!”

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2.कांग्रेस में नई जान फूंक दी युवा विधायक ने..
हरदा में वर्षों बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ऐसा जोश देखने को मिला जब #किसानों की समस्याओं पर यह आंदोलन कांग्रेस के लिए “टर्निंग पॉइंट” साबित हो सकता है।
धरने के दौरान अभिजीत शाह का नेतृत्व साफ दिखा — उन्होंने न सिर्फ मंच से बोला, बल्कि मैदान में उतरकर नेतृत्व किया।
युवा विधायक ने यह संदेश दिया कि जनता की तकलीफों पर चुप बैठना उनका स्वभाव नहीं है।
धरना प्रदर्शन का यह वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहीं हैं।
हर प्लेटफ़ॉर्म पर एक ही चर्चा — “हरदा में जो किया, वो कर दिखाया — अभिजीत शाह ने।”
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3. परिवार से राजनीति की गहरी मकड़ाई राजघाराने की विरासत — लेकिन अपनी पहचान खुद बनाई…
अभिजीत शाह टिमरनी विधानसभा से कांग्रेस के विधायक हैं। वे मध्य प्रदेश के सबसे युवा विधायक हैं।
उनके पिता अजय शाह, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि उनके चाचा विजय शाह भाजपा सरकार में मंत्री हैं।
दूसरे चाचा संजय शाह, जो भाजपा से विधायक रहे, उन्हें चुनाव में मात देकर अभिजीत शाह ने जीत हासिल की थी।
राजनीतिक विरासत के बावजूद उन्होंने अपनी पहचान जमीनी नेता और जनता के विधायक के रूप में बनाई है।
उनकी कार्यशैली में युवा जोश, सीधी बात और आक्रोश का मिश्रण है। वे किसी की परवाह नहीं करते — जनता के मुद्दे पर सीधे मोर्चा संभालते हैं।
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4. “रील वाले विधायक” से लेकर जनता के दिलों तक — अभिजीत शाह का बढ़ता कद
सोशल मीडिया पर सक्रियता, जनता से जुड़ाव और हर मुद्दे पर खुलकर बोलने की वजह से अभिजीत शाह को लोग ‘रील वाले विधायक’ के नाम से भी पुकारते हैं।
लेकिन अब यह “रील वाला टैग” एक रियल लीडरशिप में बदलता दिख रहा है।
धरना प्रदर्शन की यह घटना उनके राजनीतिक सफर की सबसे साहसिक झलक बन गई है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उनका जोश और नेतृत्व देखकर कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कहा — “अगर कांग्रेस में ऐसे युवा आगे आएं, तो संगठन में नई जान आ सकती है।”
अभिजीत शाह ने अपने भाषण में कहा —
> “जब तक किसानों को उनका हक नहीं मिलेगा, हम पीछे नहीं हटेंगे। सत्ता जनता की है, और जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।”

उनका यह बयान अब हर गांव, हर चौपाल और हर सोशल मीडिया पेज पर गूंज रहा है।
5.इधर चाचा विजय शाह (मंत्री) गाइड कर रहे हैं अभिजीत को, जो रहा कल चर्चा में…
कल के इस प्रदर्शन में लोगों में चर्चा का विषय था कि इतना राजनीति में सूझबूझ के साथ लड़ना और आगे बढ़ना अभिजीत शाह को उनके चाचा जो भाजपा सरकार में मंत्री हैं और प्रदेश सरकार में बड़ा दमखम रखते हैं। उनको राजनीति के गुर सीखना और आगे बढ़ना पूरा गाइडेंस उनका अभिजीत के पीछे होता है। कुँवर विजय शाह मध्य प्रदेश सरकार में जनजातीय कार्य विभाग, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग, तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के मंत्री हैं।
एक निष्कर्ष के तौर पर देखें तो हरदा की राजनीति में नया अध्याय, ‘अभिजीत शाह’ का नाम इतिहास में दर्ज…
हरदा के इस ऐतिहासिक #धरना-#प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि नेतृत्व उम्र नहीं, हिम्मत से तय होता है।
कलेक्टर गेट फांदकर जनता की आवाज़ को सत्ता तक पहुँचाने वाले इस युवा विधायक ने दिखा दिया कि वह किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटते।
अभिजीत शाह आज हरदा ही नहीं, पूरे मध्य प्रदेश की राजनीति में युवा नेतृत्व और साहस का प्रतीक बनकर उभरे हैं।
कांग्रेस के लिए यह प्रदर्शन एक संदेश है —
अगर अभिजीत शाह जैसे नेता आगे आएं, तो जनता के दिलों तक पहुँचने में अब देर नहीं।
इस पूरे मामले में ज्ञापन देना एक अधिकारी के लिए औपचारिकता होती है। जो कोई भी अधिकारी जिसको कलेक्टर कहे वह उपस्थित होकर समस्याओं को सुनते हुए ज्ञापन ले लें। जिसमें ज्ञापन देने वाले या आवेदन देने वाले की बातें ऊपर पहुंचानी होती है, लेकिन देश में राजनीति भी कोई चीज होती है।
किसान कांग्रेस ने अपनी मांगों के लिए रैली और प्रदर्शन में धर्मेंद्र चौहान (प्रदेश अध्यक्ष) किसान कांग्रेस, कांग्रेस कमेटी का जिला अध्यक्ष मोहन बिश्नोई, हरदा विधायक डॉ रामकिशोर दोगने, टिमरनी विधायक अभिजीत शाह, किसान नेता केदार शंकर सिरोही, पूर्व जिला अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पवार, जनपद विधायक प्रतिनिधि राहुल पटेल हार्दिक किसान कांग्रेस के प्रतिनिधि एवं किसान मौजूद रहे थे।


