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Thursday, January 15, 2026

किसानों को राहत — तवा नहर से सिंचाई हेतु 3 नवंबर से छोड़ा जाएगा पानी

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रबी फसलों की सिंचाई को लेकर हुई संभागीय जल उपयोगिता समिति की अहम बैठक

नहरों की अधूरी सफाई और कमजोर तैयारी पर उठे सवाल

किसान बोले — प्रशासन की लापरवाही से फसलें हो सकती हैं प्रभावित

 

हरदा :- रबी फसलों की सिंचाई को लेकर नर्मदापुरम संभाग में सोमवार को आयुक्त कार्यालय में संभागीय जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयुक्त कृष्ण गोपाल तिवारी ने की। बैठक में पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला, डीआईजी प्रशांत खरे, कलेक्टर नर्मदापुरम सोनिया मीना, पुलिस अधीक्षक साई कृष्ण एस. थोटा, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता राजाराम मीना, कृषि उप संचालक जे.आर. हेडाऊ, विद्युत विभाग के जीएम विनोद सिंह भदौरिया सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

वीसी के माध्यम से हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी सहित अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में निर्णय हुआ कि हरदा जिले में 3 नवंबर, सिवनी मालवा में 5 नवंबर, इटारसी में 7 नवंबर और सोहागपुर में 10 नवंबर से तवा नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। हालांकि प्रशासन ने यह शर्त भी रखी कि यदि लगातार बारिश हुई तो तिथियों में परिवर्तन संभव है।

 

बैठक में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता ने बताया कि तवा जलाशय में 100 प्रतिशत यानी 1949 एमसीएम पानी संग्रहित है, परंतु नहरों की सफाई का काम अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। यह बात किसानों के लिए चिंता का विषय है। किसानों का कहना है कि हर साल प्रशासन आखिरी समय पर तैयारी करता है, जिससे सिंचाई व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। कई स्थानों पर नहरें गाद और झाड़ियों से भरी हैं, जिनसे पानी का प्रवाह बाधित हो सकता है।

किसान संगठनों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जलाशय पूरी तरह भरा है, तो फिर नहरों की साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य महीनों पहले क्यों नहीं किया गया? किसानों ने आरोप लगाया कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। हरदा, टिमरनी, खिरकिया और आसपास के किसान पहले ही बिजली कटौती और डीजल दरों से परेशान हैं, अब अगर पानी में भी देरी हुई तो रबी की फसलें सूख सकती हैं।

 

कमिश्नर तिवारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नहरों से पानी छोड़े जाने से पहले सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित की जाए, लेकिन किसानों का कहना है कि केवल निर्देशों से खेत नहीं सिंचते — ज़रूरी है कि ज़मीनी कार्रवाई की जाए। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों की तत्काल सफाई पूरी कराई जाए, पानी का समान वितरण सुनिश्चित हो और टेल क्षेत्रों तक जल पहुँचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

 

कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि अगर प्रशासनिक तैयारियाँ इसी तरह अधूरी रहीं, तो हजारों एकड़ रबी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

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